दिल्ली–NCR में ड्रग नेटवर्क पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई ने पूरे अपराध जगत में हलचल मचा दी है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की संयुक्त टीम ने एक ऑपरेशन में 332 किलो ड्रग बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 262 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
यह ऑपरेशन न केवल राजधानी की सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह भी दिखाता है कि ड्रग माफिया किस तरह आम जिंदगी के पीछे छिपकर अरबों का काला कारोबार चला रहे थे।
एक पॉश फ़ार्महाउस से शुरू हुई कहानी
जांच एजेंसियों के अनुसार, ऑपरेशन की शुरुआत दिल्ली के एक पॉश फ़ार्महाउस पर की गई गुप्त छापेमारी से हुई थी। शुरुआती इनपुट मामूली लगता था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पूरा केस एक विशाल इंटरनेशनल ड्रग सिंडिकेट की ओर मुड़ गया।
फ़ार्महाउस से जब पुलिस ने 328 किलो ड्रग बरामद किया, तो यह दिल्ली पुलिस और NCB के इतिहास की सबसे बड़ी रिकवरी में से एक बन गई।
नोएडा के छोटे से फ्लैट में छिपा ‘बड़ा खेल’
इस कार्रवाई का असली मोड़ तब सामने आया, जब जांच टीम नोएडा सेक्टर-5 हरौला के एक साधारण से फ्लैट तक पहुंची। यहाँ पकड़ा गया 25 साल का शेन वारिस, जो दिखने में एक आम सेल्स मैनेजर था, असल में इस पूरे इंटरनेशनल ड्रग रैकेट का मास्टरमाइंड निकला।
NCB सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में शेन ने स्वीकार किया कि उसके इशारे पर ही दिल्ली के फ़ार्महाउस से भारी मात्रा में ड्रग स्टोर और सप्लाई किया जाता था। महज 25 साल की उम्र में इतना बड़ा नेटवर्क चलाना जांच एजेंसियों के लिए भी चौंकाने वाली बात है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि यह रैकेट सिर्फ दिल्ली–NCR तक सीमित नहीं है। इसके तार देश के कई राज्यों में फैले होने की आशंका जताई जा रही है। टीम अब उन सभी लिंक की तलाश में है, जिन्होंने इस नेटवर्क को चलाने में मदद की।
सलीम शेख की गिरफ्तारी और ‘ओरी’ का नाम सामने आने से मचा बवाल
ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किए गए एक अन्य आरोपी सलीम शेख ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले दावे किए। उसने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ‘ओरी’ का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि—
- ओरी की अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भांजे से करीबी पहचान है
- वह ड्रग का सेवन करता है
- ड्रग पार्टियों में शामिल होता है
इन दावों के बाद मुंबई NCB ने ओरी को तुरंत पूछताछ के लिए तलब किया और उससे लगभग 5 घंटे तक पूछताछ की गई।
ओरी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को नकार दिया है। हालांकि एजेंसियां अभी भी उसकी गतिविधियों की जांच कर रही हैं।
जांच के सामने बड़े सवाल
इस कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
सिर्फ 25 साल की उम्र में शेन वारिस इतना बड़ा ड्रग साम्राज्य कैसे खड़ा कर गया?
क्या इसके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय गिरोह या बड़ा फाइनेंसर था?
332 किलो ड्रग दिल्ली–NCR तक कैसे पहुंच गया?
क्या सप्लाई नेटवर्क एयर रूट, पोर्ट्स या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा था?
क्या प्रशासन की निगरानी में कोई बड़ी चूक हुई है?
इतनी बड़ी मात्रा में “सफेद ज़हर” का लगातार आना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
ड्रग माफियाओं पर अब तक की सबसे बड़ी चोट
NCB और दिल्ली पुलिस की यह संयुक्त कार्रवाई ड्रग नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है। इतनी भारी मात्रा में ड्रग की बरामदगी न केवल सप्लाई चेन को तोड़ती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि राजधानी में छिपे ड्रग माफिया किसी भी कीमत पर पकड़े जाएंगे।
जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है। एजेंसियां डिजिटल ट्रेल, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स खंगाल रही हैं।
यह मामला न सिर्फ एक क्रिमिनल केस है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी भी है कि ड्रग माफिया किस तेजी से अपने नेटवर्क फैला रहे हैं और किस तरह आम दिखने वाले लोगों को ढाल बनाकर अरबों का काला कारोबार कर रहे हैं










