अफ्रीकी देश सूडान में पिछले दो साल से जारी संघर्ष ने मानवीय संकट को गंभीर बना दिया है। राजधानी में एक बच्चों के अस्पताल पर कब्जे के दौरान 460 से अधिक मरीज और मेडिकल स्टाफ की जान चली गई। दोनों तरफ के सैनिक एक-दूसरे पर युद्ध अपराधों के आरोप लगा रहे हैं।
ट्रंप ने जताई चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सूडान में हालात को लेकर चिंता जताई और इसे दुनिया का “सबसे बड़ा मानवीय संकट” करार दिया। उन्होंने कहा कि सूडान में खाने और डॉक्टरों की भारी कमी है और वहां भयानक अत्याचार हो रहे हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सूडान कभी महान सभ्यता और संस्कृति वाला देश था, लेकिन अब बुरी हालत में है। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय देश मिलकर काम करें तो स्थिति सुधारी जा सकती है। उन्होंने सऊदी अरब, यूएई, मिस्र जैसे देशों के साथ मिलकर हिंसा रोकने की बात कही और दुनिया से भी इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की।
दो साल से जारी संघर्ष में पहली बार नरमी
सूडान में रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) और सूडानी सेना (एसएएफ) के बीच हिंसक टकराव पिछले दो साल से जारी है। हाल ही में, आरएसएफ ने अमेरिका के मध्यस्थता प्रस्ताव के तहत मानवीय संघर्ष-विराम को मानने की सहमति जताई, ताकि नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाई जा सके। अमेरिका के वरिष्ठ सलाहकार मस्साद बुलोस ने भी कहा कि दोनों पक्ष सिद्धांततः युद्ध रोकने पर सहमत हो गए हैं।
अस्पताल पर कब्जा और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन
सितंबर में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने अपनी रिपोर्ट में दोनों पक्षों पर नागरिकों पर हमले, हत्याएं, यातना और यौन हिंसा जैसे गंभीर आरोप लगाए। रिपोर्ट में बताया गया कि यौन हिंसा के मामलों में आरएसएफ और एसएएफ दोनों के सैनिक शामिल पाए गए।
सूडान संकट अभी भी जारी है, लेकिन मध्यस्थता प्रयासों से पहली बार नरमी के संकेत दिख रहे हैं। दुनिया की निगाहें अब वहां के हालात पर बनी हुई हैं।









