प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को ग्रेटर नोएडा स्थित रियल एस्टेट कंपनी जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (MD) मनोज गौर को गिरफ्तार किया है।आरोपी को कथित धोखाधड़ी और घर खरीदारों के पैसे की हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत की गई है।Ed का आरोप है कि मनोज गौर और उनकी कंपनियों ने ग्राहकों और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की है। जांच में सामने आया है कि जेपी इंफ्राटेक, जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड और उनसे जुड़ी अन्य रियल एस्टेट कंपनियों ने घर खरीदारों से राशि प्राप्त की, लेकिन उन्हें फ्लैट या प्रोजेक्ट्स नहीं सौंपे गए हैं। इसके बजाय, इस राशि को अन्य प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट किया गया, जिससे कई निवेशकों और घर खरीदारों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

Ed ने बताया कि जेपी ग्रुप के तहत गौरसंस ,गुलशन,महागुन और सुरक्षा रियल्टी जैसी कंपनियां भी इस मामले में शामिल हैं। जांच के दौरान Ed की टीम ने दिल्ली- NCR और मुंबई के कुल 12 ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें नोएडा के सेक्टर 128 में स्थित जेपी बिल्डर के मार्केटिंग ऑफिस को भी शामिल किया गया।यह मामला लगभग 12,000 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। मनोज गौर पर आरोप है कि उन्होंने अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में घर खरीदारों से प्राप्त राशि का गलत इस्तेमाल किया। इससे कई निवेशकों का पैसा फंस गया और कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई।
जेपी ग्रुप की दिवालियापन की स्थिति
जेपी ग्रुप की शुरुआत सन 1981 में जयप्रकाश गौर ने की थी। लगभग 44 साल के इतिहास के बावजूद कंपनी अब दिवालियापन की स्थिति में पहुंच चुकी है। इस बीच खबर आई थी कि अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने कंपनी को खरीदने की प्रक्रिया में सबसे अधिक बोली लगाई है। इस नीलामी में पहले खनन क्षेत्र की कंपनी वेदांता सबसे आगे थी, लेकिन अडानी ने सबसे ऊंची बोली लगाकर इस रेस में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।जेपी ग्रुप के दिवालियापन और वित्तीय विवाद ने भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में एक बार फिर से निवेशकों और ग्राहकों के विश्वास पर सवाल खड़ा कर दिया है।

Ed की टीम ने जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड, जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड और उनके सहयोगियों के 15 ठिकानों पर छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई लगातार कंपनी पर शिकंजा कसने की प्रक्रिया का हिस्सा है।Ed की गिरफ्तारी और जांच से स्पष्ट होता है कि भारतीय वित्तीय और रियल एस्टेट सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संस्थाओं को कोई ढील नहीं दी जाएगी।









