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ASSAM के कोकराझार जिले में पुलिस-उग्रवादी मुठभेड़ में NSLA कमांडेंट अपिल मुर्मू ढेर, रेलवे ब्लास्ट में था मुख्य आरोपी

असम के कोकराझार जिले में पुलिस और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक उग्रवादी मारा गया । घटना सलकटी पुलिस चौकी क्षेत्र के नदांगुरी इलाके में हुई। मारे गए उग्रवादी की पहचान अपिल मुर्मू उर्फ रोहित मुर्मू (उम्र 40 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुर्मू हाल ही में कोकराझार रेलवे ट्रैक पर हुए बम विस्फोट का मुख्य आरोपी था और पहले भी झारखंड में इसी तरह के धमाकों में शामिल रहा था।

कोकराझार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एसपी पुष्पराज सिंह ने बताया कि शुक्रवार सुबह नदांगुरी पहाड़ियों में एक सर्च ऑपरेशन के दौरान यह मुठभेड़ हुई। पुलिस ने मुर्मू को घेरकर गोलीबारी की। गोलीबारी में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस दौरान उसके पास से एक पिस्तौल, दो ग्रेनेड, एक वोटर आईडी कार्ड और एक आधार कार्ड बरामद हुए, जो झारखंड राज्य के थे।

रेलवे ट्रैक धमाका और भूमिका

जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर की रात लगभग 1 बजे कोकराझार और सलकटी स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध विस्फोट हुआ। धमाके से ट्रैक और स्लीपर क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे 8 से 10 ट्रेनें देर से चलीं। रेलवे पुलिस अधीक्षक प्रांजित बोराह ने बताया कि ट्रैक की मरम्मत सुबह 5.25 बजे तक पूरी कर दी गई और 5.30 बजे से रेल सेवाएं सामान्य हो गईं। अपिल मुर्मू को इस विस्फोट का मुख्य आरोपी माना जा रहा था और पुलिस उसके माओवादी नेटवर्क से जुड़े अन्य साथियों की पहचान के लिए जांच कर रही है।

झारखंड और असम में सक्रिय रहा उग्रवादी

पुलिस के अनुसार, मुर्मू पहले झारखंड में भी बम धमाके की घटनाओं में शामिल रहा। पिछले साल अक्तूबर में उसने झारखंड के रेलवे ट्रैक पर धमाका किया और उसके बाद असम भाग गया। झारखंड में वह रोहित मुर्मू के नाम से जाना जाता था, जबकि असम में वह अपिल मुर्मू के नाम से सक्रिय था। वह कोकराझार जिले के कचुगांव ग्रामपुर का निवासी था और दोनों राज्यों में उसके व्यापक संपर्क थे।

NSLA से माओवादी नेटवर्क तक का सफर

मुर्मू पहले नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी (NSLA) का सदस्य था। जब संगठन ने आत्मसमर्पण किया, तब मुर्मू ने सरेंडर करने से इनकार किया और झारखंड भाग गया। वहां उसने NSLA का नया गुट बनाकर खुद को कमांडेंट बना लिया। इसके बाद उसने विभिन्न माओवादी संगठनों से संबंध बनाए और अपने उग्रवादी नेटवर्क का विस्तार किया। पुलिस के अनुसार, मुर्मू 2015 से झारखंड में कई हिंसक घटनाओं और तोड़फोड़ की गतिविधियों में शामिल रहा।

पुलिस ऑपरेशन और बरामद सामग्री

झारखंड पुलिस की एक टीम हाल ही में असम आई थी ताकि वह स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर मुर्मू का पता लगा सके। ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने उसके पास से एक पिस्तौल, दो ग्रेनेड और पहचान संबंधी दस्तावेज बरामद किए। अब पुलिस उसके अन्य साथियों को पकड़ने और इस मामले की गहन जांच कर रही है।

इस मुठभेड़ के बाद पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है, और यह न केवल कोकराझार बल्कि निचले असम और उत्तरी बंगाल में सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। पुलिस का कहना है कि अपिल मुर्मू के मारे जाने से माओवादी और उग्रवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है, लेकिन क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा ताकि बाकी साथियों को भी गिरफ्तार किया जा सके।

 

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