नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश ने भूस्खलन और बाढ़ का भीषण रूप ले लिया है। देश के कई हिस्सों में तबाही का आलम है। अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग लापता बताए जा रहे हैं। सैकड़ों यात्री और स्थानीय लोग सड़कों के कट जाने और पुलों के टूटने से फंसे हुए हैं।कई जिलों में तबाही मचाने वाली बारिशनेपाल के बागमती, कर्णाली और गंडकी प्रांतों में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया है।

राजधानी काठमांडू, पोखरा, ललितपुर, चितवन, म्याग्दी, और डोटी जिलों में भूस्खलन से सैकड़ों घर मिट्टी में दब गए हैं। कई जगह नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है।नेपाल के गृह मंत्रालय के मुताबिक, भारी बारिश के कारण कई मुख्य राजमार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप है। सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।सैकड़ों लोग बेघर, फंसे यात्री कर रहे मदद का इंतज़ार भूस्खलन के कारण कई गांवों का संपर्क मुख्य शहरों से टूट गया है।सैकड़ों परिवार स्कूलों और सरकारी भवनों में शरण लिए हुए हैं।
पोखरा और म्याग्दी जिलों में टूरिस्ट बसों में फंसे यात्री पिछले दो दिनों से मदद का इंतजार कर रहे हैं।एक स्थानीय निवासी ने बताया कि “हमने कभी इतनी तेज बारिश नहीं देखी। पूरी घाटी मिट्टी और पत्थरों से भर गई है, घर बह गए, और सड़कों पर पानी का सैलाब है।”
सरकार ने आपात राहत अभियान शुरू किया
नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में आपातकालीन राहत अभियान शुरू कर दिया है।सेना और पुलिस के हेलिकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है।सरकार ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने और बेघर हुए लोगों के लिए अस्थायी शिविर बनाने की घोषणा की है।आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे पहाड़ी और नदी किनारे वाले इलाकों से दूर रहें।
नेपाल में आई इस बाढ़ का असर भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भी देखने को मिल रहा है।कई नदियों में जलस्तर बढ़ने से भारत के महराजगंज, सिद्धार्थनगर और बेतिया जिलों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया हैनेपाल के मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।संभावना है कि बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति और गंभीर हो सकती है।नेपाल इस वक्त भयानक प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है।
भूस्खलन और बाढ़ ने न सिर्फ लोगों की जान ली है, बल्कि हजारों परिवारों को बेघर कर दिया है।सरकार और राहत एजेंसियां पूरी कोशिश में हैं कि जल्द से जल्द फंसे लोगों को बचाया जा सके।










