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Ram Mandir चोरी में नए खुलासे

Ayodhya में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले में जांच के दौरान एक नया खुलासा सामने आया है। आरोपियों ने चोरी के बाद मिलने-जुलने और रकम के बंटवारे के लिए एक सुनसान स्थान को अपना ठिकाना बना रखा था। जांच एजेंसियां अब इस स्थान को पूरे मामले की अहम कड़ी मान रही हैं। अयोध्या-लखनऊ हाईवे के पास 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के किनारे स्थित एक एकांत क्षेत्र में आरोपी नियमित रूप से जुटते थे। बाहरी तौर पर यह जगह सामान्य दिखाई देती थी, लेकिन पुलिस जांच में सामने आया है कि यहां कथित तौर पर चोरी से जुड़े फैसले लिए जाते थे। यहीं रकम का हिसाब-किताब होता और आगे की गतिविधियों पर चर्चा की जाती थी। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी घटना के बाद सीधे अपने घर नहीं जाते थे। वे पहले इस निर्धारित स्थान पर पहुंचते थे, जहां समूह के अन्य सदस्य उनका इंतजार करते थे। पुलिस का मानना है कि इस जगह का चयन इसलिए किया गया था ताकि लोगों की नजरों से बचकर बैठकों को अंजाम दिया जा सके। मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। सूत्रों के मुताबिक, उसने कथित तौर पर बताया कि चोरी की गई रकम को सदस्यों के बीच बांटा जाता था। अधिकांश मामलों में हिस्सा बराबर-बराबर दिया जाता था, हालांकि कुछ मौकों पर विशेष भूमिका निभाने वाले लोगों को अतिरिक्त रकम भी मिलती थी। पुलिस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझने और मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ रहे हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस कथित चढ़ावा चोरी मामले से जुड़े नए खुलासे भी सामने आते जा रहे हैं।

पुलिस क्यों पहुंची इसी जगह ?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में पुलिस लगातार नए तथ्यों को जोड़ने में जुटी हुई है। इसी कड़ी में पुलिस ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को रिमांड के दौरान कई महत्वपूर्ण स्थानों पर ले जाकर घटनाक्रम की कड़ियों को समझने का प्रयास किया। अधिकारियों का उद्देश्य पूछताछ में सामने आए तथ्यों का सत्यापन करना और संभावित साक्ष्य जुटाना था। पुलिस सबसे पहले आरोपी को कौशलपुरी स्थित एक योग केंद्र लेकर पहुंची। यहां जांच टीम ने कुछ दस्तावेजों और अन्य संभावित सबूतों की तलाश की। अधिकारियों का मानना है कि मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सुराग इन स्थानों से प्राप्त हो सकते हैं, जो जांच को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। इसके बाद पुलिस आरोपी को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के निकट स्थित उस सुनसान इलाके में लेकर गई, जहां कथित तौर पर चोरी के बाद आरोपियों की बैठकें हुआ करती थीं। जांच अधिकारियों ने आरोपी से उस स्थान की पहचान करवाई और यह समझने की कोशिश की कि समूह के सदस्य वहां किस प्रकार पहुंचते थे और उनकी गतिविधियां किस तरह संचालित होती थीं। पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों को सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण संकेत भी मिले हैं। आरोपियों को यह भरोसा था कि उनके खिलाफ पर्याप्त डिजिटल सबूत नहीं बचेंगे। इसी कारण वे जांच से बच निकलने को लेकर काफी हद तक निश्चिंत थे। जांच अधिकारियों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित प्राप्त हो गए हैं। यही रिकॉर्डिंग अब पूरे मामले में अहम भूमिका निभा रही हैं। उपलब्ध तकनीकी साक्ष्य और पूछताछ से मिले तथ्यों के आधार पर मामले की परतें तेजी से खुल रही हैं और आने वाले दिनों में जांच में और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

चोरी के पैसों से क्या-क्या खरीदा?

पूछताछ में अविनाश शुक्ला ने यह भी कहा कि चोरी की राशि केवल खर्च नहीं की गई, बल्कि उससे संपत्तियाँ भी बनाई गईं। पुलिस के अनुसार, इसी धन से एक ब्रेजा कार खरीदी गई। कार उसने अपने भाई के नाम पर ली, क्योंकि वह शिक्षक है और उसे लगा कि इससे किसी को संदेह नहीं होगा. गांव में घर बनाने और भाई को बड़ी राशि देने का मामला भी पूछताछ में उजागर हुआ है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी की पहचान पर यह कार भी जब्त कर ली गई, पुलिस ने पूछताछ के दौरान अविनाश को लगभग 45 दिनों की CCTV वीडियो दिखाई। फुटेज में अपने आप को कथित रूप से चोरी करते हुए देखकर वह लंबे समय तक इनकार नहीं कर पाया और उसने चोरी को मान लिया। अविनाश की पूछताछ के बाद पुलिस अब अन्य आरोपियों तक पहुँच रही है. अदालत से अनुमति प्राप्त करने के पश्चात जांच अधिकारी जेल जाकर अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, करुणेश पांडे और मनीष यादव से बातचीत करेंगे। पुलिस हर एक कड़ी को जोड़ रही है। योग केंद्र से ब्रेजा कार तक, CCTV से 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के उस अकेले स्थान तक... हर जगह अब इस जांच की कथा का हिस्सा बन चुकी है. और जैसे-जैसे जांच चल रही है, वैसे-वैसे इस कथित चढ़ावे की चोरी से जुड़े नए खुलासे प्रकाश में आ रहे हैं। मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को पुलिस रिमांड के दौरान इसी जगह लाया गया। अधिकारियों ने उसकी मदद से उस स्थान की पहचान करवाई, जहां कथित तौर पर चोरी के बाद बैठकें आयोजित होती थीं। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों का नेटवर्क कैसे संचालित होता था और धन का वितरण किस प्रकार किया जाता था।
रिमांड के दौरान पुलिस ने आरोपी को विभिन्न स्थानों पर ले जाकर जांच की, जिसमें ऐसे स्थान शामिल थे, जहां से दस्तावेज और अन्य संभावित साक्ष्य प्राप्त किए गए। अधिकारियों का लक्ष्य पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ना और आरोपियों की गतिविधियों को विस्तार से समझना है। जांच एजेंसियों के लिए सीसीटीवी फुटेज इस मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों को यह विश्वास था कि उनके खिलाफ कोई ठोस डिजिटल सबूत नहीं बचेगा। इसी कारण कथित तौर पर कुछ मौकों पर निगरानी प्रणाली के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश भी की गई। जांच अधिकारियों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण सीसीटीवी रिकॉर्ड सुरक्षित मिले हैं, जिनके आधार पर पुलिस को घटनाओं की श्रृंखला समझने में मदद मिली है। पूछताछ के दौरान आरोपी को लंबी रिकॉर्डिंग दिखाई गई, जिसके बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। अब मामले की जांच आर्थिक पहलुओं पर भी केंद्रित हो गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित चोरी की रकम का उपयोग कहां किया गया। जांच में कुछ संपत्तियों और वाहनों की खरीद से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है। पुलिस इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि आगे की पूछताछ से और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस कथित चढ़ावा चोरी मामले की नई परतें खुल रही हैं।

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