Delhi के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान राम मंदिर और भारतीय जनता पार्टी को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े विषयों पर राजनीतिक दलों की भूमिका को जनता गंभीरता से देखती है। केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए दावा किया कि राम मंदिर के उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी उन्होंने अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन नहीं किए। उनका कहना था कि सार्वजनिक मंचों पर राम मंदिर का उल्लेख करने और वास्तविक रूप से वहां जाकर श्रद्धा व्यक्त करने में अंतर होता है, जिस पर जनता भी ध्यान देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावी राजनीति में राम मंदिर और भगवान राम के नाम का बार-बार इस्तेमाल करती है। केजरीवाल के अनुसार, धार्मिक आस्था को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने के बजाय उससे जुड़े मूल्यों और भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों की आस्था किसी भी राजनीतिक एजेंडे से ऊपर है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस घटना की खबरों से अनेक श्रद्धालु आहत हुए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका मानना है कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक उम्मीद करते हैं कि धर्म और आस्था से जुड़े विषयों पर राजनीति से ऊपर उठकर काम किया जाए। साथ ही उन्होंने मांग की कि संबंधित मामलों की जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर उचित कार्रवाई की जाए। केजरीवाल के इन बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।

एसआईटी पर भी बोले अरविंद केजरीवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने चुनावी सभाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में कई बार राम मंदिर का उल्लेख किया और उसके नाम पर वोट भी मांगे। उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता लगातार भगवान राम का नाम लेता है, तो उसकी व्यक्तिगत आस्था भी लोगों के सामने स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए। केजरीवाल ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने देशभर के सनातन धर्म में विश्वास रखने वाले लोगों को दुखी किया है। उनका मानना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) से लोगों को निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद है। जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। आम आदमी पार्टी प्रमुख ने यह भी कहा कि सरकार बदलने की स्थिति में ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि धार्मिक संस्थानों और श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने अपनी पार्टी को सनातन मूल्यों का समर्थक बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी धार्मिक आस्था का सम्मान करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल धार्मिक मुद्दों का उपयोग चुनावी लाभ के लिए करते हैं, जबकि वास्तविक सेवा और संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में वह अयोध्या और कथित चढ़ावा मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर और विस्तार से अपनी बात रखेंगे। इसके लिए उन्होंने अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की भी घोषणा की, जिसमें जांच और उससे जुड़े तथ्यों पर चर्चा की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम मंदिर और उससे जुड़े मुद्दे देश की राजनीति में लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में विभिन्न दलों के नेताओं के बयान आने वाले समय में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं। फिलहाल केजरीवाल के इस बयान के बाद भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर भी सभी की नजर बनी हुई है।










