Iran ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक नई आर्थिक योजना पर काम शुरू किया है, जिसके तहत इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूली जा सकती है। यह कदम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर डाल सकता है, क्योंकि यह मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है। ईरान का अनुमान है कि इस योजना के लागू होने के बाद उसे हर साल लगभग 40 अरब डॉलर तक की आय हो सकती है। यह आय सुरक्षा सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण और समुद्री प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए शुल्क के रूप में वसूली जाएगी। तेहरान प्रशासन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए पड़ोसी देशों, खासकर ओमान सहित खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों के साथ बातचीत कर रहा है। ईरान का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया जा रहा है। इस प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रिया मिल रही है। कुछ विशेषज्ञ इसे आर्थिक दृष्टि से एक बड़ा कदम मानते हैं, जबकि कई जानकारों का कहना है कि यह वैश्विक समुद्री नियमों और मुक्त व्यापार सिद्धांतों के खिलाफ जा सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में किसी भी तरह का बदलाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, शिपिंग लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है।
होर्मुज से ईरान की कमाई
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को लेकर एक नया प्रस्ताव सामने रखा है, जिसमें इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा और पर्यावरण सेवाओं के नाम पर शुल्क वसूली की बात कही गई है। यह प्रस्ताव मौजूदा व्यवस्थाओं से अलग एक स्थायी कमाई मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। “इस्लामाबाद मेमोरेंडम” में होर्मुज के भविष्य के प्रबंधन का उल्लेख तो है, लेकिन उसमें किसी प्रकार के ट्रांजिट फीस या टोल सिस्टम का प्रावधान नहीं किया गया है। इसके बावजूद ईरान इस खालीपन को एक नए आर्थिक अवसर के रूप में देख रहा है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के हालिया खुलने से इसके संचालन और प्रबंधन को नए सिरे से परिभाषित करने का अवसर मिला है। इसी आधार पर तेहरान एक ऐसा मॉडल तैयार करना चाहता है जिसमें नियमित शुल्क प्रणाली लागू की जा सके। इस योजना के तहत ईरान चाहता है कि पड़ोसी खाड़ी देश, विशेषकर ओमान, इस ढांचे में शामिल हों और इससे होने वाली आय में हिस्सेदारी प्राप्त करें। इससे क्षेत्रीय सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की बात कही जा रही है। ईरान ने यह प्रस्ताव चीन जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के सामने भी रखा है। हालांकि अभी यह योजना प्रारंभिक चर्चा के स्तर पर है और इसे लागू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहमति और कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।

ईरान को तुर्की से ब्लूप्रिंट की उम्मीद
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े अपने नए प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूद व्यवस्थाओं और उदाहरणों का अध्ययन कर रहा है। इस प्रक्रिया में कई ऐतिहासिक और कानूनी मॉडल शामिल किए जा रहे हैं, ताकि एक व्यवहारिक और स्वीकार्य ढांचा तैयार किया जा सके। ईरानी अधिकारियों ने विशेष रूप से तुर्की के डार्डानेल्स जलडमरूमध्य प्रबंधन मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया है। 1936 के मोंट्रो कन्वेंशन के तहत तुर्की इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में जहाजों से लाइटहाउस सेवाओं, बचाव अभियानों और स्वच्छता व्यवस्था जैसी सुविधाओं के लिए शुल्क वसूलता है। इस मॉडल को देखते हुए ईरान यह संभावना तलाश रहा है कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है, जहां सुरक्षा और सेवाओं के बदले एक निर्धारित शुल्क प्रणाली लागू हो। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियां काफी अलग हैं। होर्मुज जैसे संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जलमार्ग के लिए किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक शुल्क व्यवस्था लागू करने से पहले व्यापक वैश्विक सहमति आवश्यक होगी। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की मंजूरी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह प्रस्ताव शुरुआती विचार-विमर्श के चरण में है और इसे लागू करने से पहले कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ विस्तृत चर्चा और समझौते की आवश्यकता होगी।










