Ludhiana स्थित एक प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थान में कार्यरत वरिष्ठ वैज्ञानिक के खिलाफ उनकी महिला सहकर्मी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। शिकायत में महिला ने आरोपी पर उत्पीड़न, धमकी देने और निजी जानकारी के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता महिला वैज्ञानिक ने आरोप लगाया है कि आरोपी लंबे समय से उन्हें परेशान कर रहा था। उनके अनुसार, दोनों एक ही संस्थान में कार्यरत हैं और पेशेवर संबंधों के अलावा उनके बीच किसी प्रकार का निजी संबंध नहीं था। महिला का दावा है कि हाल के महीनों में आरोपी का व्यवहार लगातार आपत्तिजनक होता गया। आरोपी ने मोबाइल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बार-बार ऐसे संदेश भेजे, जिन्हें उन्होंने अनचाहा और अनुचित बताया। शिकायत में कहा गया है कि इन संदेशों की भाषा कई बार अपमानजनक और मानसिक दबाव बनाने वाली थी, जिससे उन्हें असहजता महसूस होने लगी। आरोपी ने महिला की कुछ निजी तस्वीरों और व्यक्तिगत बातचीत से जुड़ी सामग्री अपने पास होने का दावा किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल कर उनकी सामाजिक छवि और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी निजी चैट और तस्वीरें उनकी अनुमति के बिना अन्य लोगों तक पहुंचाई गईं। शिकायत के अनुसार, इससे उनके सम्मान और व्यक्तिगत जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था। मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने कई बार ऐसे संकेत दिए कि यदि उसकी बात नहीं मानी गई तो निजी सामग्री सार्वजनिक की जा सकती है। महिला का आरोप है कि इस तरह की धमकियों से वह मानसिक तनाव में आ गईं | मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति भी सक्रिय हुई है। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े नियमों के तहत समिति दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा कर रही है। समिति की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। शिकायत और प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच टीम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल प्रमाणों की पड़ताल कर रही है ताकि आरोपों की सत्यता का पता लगाया जा सके। आरोपी वैज्ञानिक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मामले के तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है और जांच के दौरान उनका पक्ष भी सामने आएगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति में जांच लंबित
लुधियाना में एक केंद्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान से जुड़े विवाद ने तूल पकड़ लिया है। एक महिला वैज्ञानिक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने संस्थान के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामला कथित यौन उत्पीड़न, पीछा करने, धमकी देने और निजी जानकारी के दुरुपयोग से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आरोपी वैज्ञानिक का व्यवहार पिछले कुछ समय से लगातार आपत्तिजनक था। महिला का कहना है कि उन्होंने कई बार इस व्यवहार को नजरअंदाज करने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर परेशान किए जाने की घटनाएं बंद नहीं हुईं। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों और पुलिस से संपर्क किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) ने भी जांच शुरू की है। यह समिति कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई और जांच के लिए गठित की जाती है। शिकायत मिलने के बाद समिति ने आरोपी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा था। जांच के दौरान दोनों पक्षों से संबंधित दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मांगे गए हैं। समिति इस बात की भी जांच कर रही है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों का समर्थन करने वाले पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध हैं या नहीं। फिलहाल समिति की जांच प्रक्रिया जारी है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच और शिकायत में प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में वर्णित घटनाओं और उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद कानूनी कार्रवाई की गई। अब मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज और अन्य डिजिटल सामग्री की भी जांच कर रही हैं। साइबर विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से तकनीकी प्रमाण मौजूद हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यस्थल पर उत्पीड़न से जुड़े मामलों में आंतरिक समिति और पुलिस जांच दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक ओर जहां संस्थान अपने स्तर पर तथ्यों की समीक्षा करता है, वहीं पुलिस कानून के तहत अपराध से जुड़े पहलुओं की जांच करती है। दूसरी तरफ आरोपी वैज्ञानिक ने अपने ऊपर लगे आरोपों से असहमति जताई है। उनका कहना है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने की बात कही है। यह मामला जांच के चरण में है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। पुलिस और संस्थान की आंतरिक समिति दोनों स्वतंत्र रूप से तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।











