पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान पर बड़े हमले किए। इसके बाद ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने भी इजराइल के समर्थन में कदम बढ़ाए। बावजूद इसके, ईरान लगातार मिसाइल हमले कर रहा है और टकराव थमता नजर नहीं आ रहा।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ क्या है?
अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस ऑपरेशन में ईरान के 48 बड़े नेता मारे गए। ईरानी मीडिया में यह भी कहा गया कि देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
खामेनेई की कथित मौत के बाद ईरान में अंतरिम नेतृत्व परिषद की पहली बैठक होने की खबर भी सामने आई है।





ईरान का पलटवार
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल समेत 9 देशों पर हमले का दावा किया है।
- तेहरान में कई जगह धमाके सुनाई दिए।
- हाइफा की ओर 6 रॉकेट दागे गए।
- इराक के एरबिल एयरपोर्ट और बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास धमाकों की खबर है।
- बहरीन में अमेरिकी नेवल बेस पर आग लगने की सूचना मिली।
- साइप्रस में ब्रिटिश एयरबेस पर भी मिसाइल हमले का दावा किया गया।
ईरान का कहना है कि वह किसी भी हमले का जवाब देगा।
लेबनान और हिज़्बुल्लाह की एंट्री
लेबनान पर इजराइली हवाई हमलों में 31 लोगों की मौत की खबर है।
इस बीच हिज़्बुल्लाह ने इजराइल पर मिसाइल हमलों की जिम्मेदारी ली है। इससे जंग का दायरा और बढ़ गया है।
खाड़ी देशों में हाई अलर्ट
- कुवैत में अमेरिकी दूतावास के पास धुआं देखा गया।
- कतर एयरवेज ने अपनी सभी उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं।
- कुवैत में एक अमेरिकी F-15 फाइटर जेट के हवा में आग पकड़ने और क्रैश होने की खबर है। पायलट सुरक्षित बाहर निकल गया। ईरान ने दावा किया है कि उसने इस जेट को गिराया।
खाड़ी देशों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कई जगह एयर रैड सायरन बजाए गए।
अब तक का नुकसान
- ईरान में करीब 200 लोगों की मौत और 740 से ज्यादा घायल होने की खबर है।
- लेबनान में 31 लोगों की जान गई।
- कई सैन्य और नागरिक ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए हैं।
यूरोपीय देशों की भूमिका
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने कहा है कि वे इजराइल की सुरक्षा में मदद के लिए तैयार हैं और ईरानी हमलों को रोकने में सहयोग देंगे। इससे साफ है कि यह संघर्ष अब क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रूप लेता जा रहा है।
आगे क्या?
अगर जल्द कूटनीतिक बातचीत शुरू नहीं हुई तो यह टकराव बड़े युद्ध में बदल सकता है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने और जरूरी होने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।फिलहाल पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं और दुनिया की नजर इस जंग पर टिकी हुई है।










