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रूस-यूक्रेन युद्ध फिर भड़का: कीव समेत कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमला,

कई घायल रविवार सुबह यूक्रेन की राजधानी कीव में जब सायरन गूंजे, तो एक बार फिर साफ हो गया कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध अभी खत्म होने वाला नहीं है। रूस ने कीव समेत कई बड़े शहरों पर मिसाइलों और ड्रोन से जोरदार हमला किया।इन हमलों में सिर्फ सैन्य ठिकानों को ही नहीं, बल्कि बिजली संयंत्र, रेलवे नेटवर्क और बंदरगाहों को भी निशाना बनाया गया। खासतौर पर ओडेसा बंदरगाह पर हुए हमले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अनाज निर्यात पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

कई शहरों में तबाही, 1 पुलिसकर्मी की मौत, 24 घायल

यूक्रेन के पश्चिमी शहर लवीव से दुखद खबर सामने आई है, जहां एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई और कम से कम 24 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हमले की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि रिहायशी इमारतें भी चपेट में आ गईं।

राजधानी कीव के अलावा निप्रो, मीकोलेव, पोल्टावा और सुमी जैसे शहरों में भी जोरदार धमाके सुने गए। कई इलाकों में बिजली सप्लाई ठप हो गई और रेलवे संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा।

ज़ेलेंस्की का बयान: रूस बातचीत नहीं, युद्ध चाहता है

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इन हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि रूस शांति वार्ता नहीं, बल्कि लगातार हमलों के जरिए यूक्रेन को कमजोर करना चाहता है।

ज़ेलेंस्की के मुताबिक, इस सप्ताह रूस ने:

  • 1,300 ड्रोन
  • 1,400 गाइडेड बम
  • 96 मिसाइलें

दागी हैं। ताजा हमले में ही 33 मिसाइल और 274 ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। इससे साफ है कि यह युद्ध अब ड्रोन और मिसाइल आधारित आधुनिक युद्ध में बदल चुका है।

यूक्रेन ने भी दिया करारा जवाब

इससे पहले यूक्रेन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए रूस के अंदर करीब 1,400 किलोमीटर तक ड्रोन हमला किया था। इसमें रूस की एक मिसाइल फैक्ट्री को नुकसान पहुंचा और 11 लोग घायल हुए। इससे साफ है कि अब यह युद्ध दोनों देशों के अंदरूनी इलाकों तक फैल चुका है।

चार साल से जारी युद्ध, दुनिया पर भी असर

यह युद्ध करीब चार साल से जारी है, जिससे न सिर्फ रूस और यूक्रेन की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार पर भी गहरा असर पड़ा है।

युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका समेत कई देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर कब्जे और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर कोई ठोस सहमति नहीं बन पा रही है।लगातार हो रहे हमलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यह युद्ध कब और कैसे खत्म होगा? मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा लगता है कि संघर्ष अभी और तेज हो सकता है।इस युद्ध का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों की जिंदगी, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ रहा है। अब पूरी दुनिया की नजरें अगली कूटनीतिक पहल और जमीनी हालात पर टिकी हुई हैं।

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